माया
*स्मृतियों में शेष रहे ।*
नब्ज ढीली पड़ जाती है, चेहरे में झुर्रियां साफ दिखाई देने लगती है , हम लाख कोसिस करते हैं अपने ढलते जीवन को छुपाने की, क्योंकि अभी जी भरा ही नहीं, हम पूरी जीवन यात्रा कर ही नही पाए ।।
संतोष अभी आया ही नही जीवन में, हम अब भी प्यार के इंतजार में भटक रहे हैं, क्योकि जो प्यार, स्नेह हमे मिला, हम उससे कहीं और कि चाहत में दूर होते गए ।।
जीवन के इस पड़ाव में करने को कुछ खास रह नही जाता, रह जाती हैं बस स्मृतियां ।।
काश वक्त करवट लेता, काश हम फिर से उसी सब को जी पाते, समझ पाते , जो सिर्फ मेरा था । सिर्फ मेरा ।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें