*स्मृतियों में शेष रहे ।* नब्ज ढीली पड़ जाती है, चेहरे में झुर्रियां साफ दिखाई देने लगती है , हम लाख कोसिस करते हैं अपने ढलते जीवन को छुपाने की, क्योंकि अभी जी भरा ही नहीं, हम पूरी ...
*स्मृतियों में शेष रहे ।* नब्ज ढीली पड़ जाती है, चेहरे में झुर्रियां साफ दिखाई देने लगती है , हम लाख कोसिस करते हैं अपने ढलते जीवन को छुपाने की, क्योंकि अभी जी भरा ही नहीं, हम पूरी ...
#माया# सर्दियों में कोहरे की धुंध सी उसकी यादें धुंधली न पड़ जाये , बस यही बजह थी की उसे याद भी साँस रोक कर करता था । उसकी याद में मानो हर लम्हा थम सा जाता था । उसकी यादो के सिवा मेरे...